Watermelon Farming| गर्मी का मौसम आते ही बाजार में तरबूज (Watermelon Farming) और खरबूज की मांग तेजी से बढ़ने लगती है। ये फल शरीर को ठंडक देते हैं और गर्मी में पानी की कमी को भी पूरा करते हैं। यही वजह है कि गर्मियों में तरबूज और खरबूज की खेती किसानों के लिए अच्छी कमाई का मौका बन सकती है।
यह फसल ज्यादा लंबा समय नहीं लेती और करीब 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है। अगर किसान सही समय पर बुवाई करें और शुरुआत से ही फसल की देखभाल करें तो अच्छी पैदावार मिल सकती है। हालांकि कई बार कीट और रोग फसल को नुकसान पहुंचा देते हैं इसलिए समय पर नियंत्रण करना जरूरी होता है। (Watermelon Farming)
बुवाई का सही समय
तरबूज (Watermelon Farming) और खरबूज की खेती के लिए फरवरी से मार्च का समय सबसे बेहतर माना जाता है। इस समय मौसम पौधों की बढ़वार के लिए अनुकूल होता है। तापमान धीरे धीरे बढ़ने लगता है जिससे बीज जल्दी अंकुरित होते हैं और पौधे तेजी से बढ़ते हैं। सही समय पर बुवाई करने से फल भी जल्दी तैयार होते हैं और किसान समय पर बाजार में बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
किस मिट्टी में करें खेती
तरबूज (Watermelon Farming) और खरबूज की अच्छी पैदावार के लिए बलुई मिट्टी बलुई दोमट मिट्टी और दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है। इन मिट्टियों में पानी का निकास अच्छा रहता है जिससे पौधों की जड़ें मजबूत रहती हैं। अगर खेत में पानी ज्यादा देर तक जमा रहता है तो पौधों की जड़ें खराब हो सकती हैं। इसलिए खेती शुरू करने से पहले खेत की मिट्टी को भुरभुरा बनाना और जल निकास की सही व्यवस्था करना जरूरी होता है।
शुरुआती अवस्था में लगते हैं रस चूसने वाले कीट
तरबूज (Watermelon Farming) और खरबूज की फसल के शुरुआती समय में कई बार रस चूसने वाले कीट बड़ी समस्या बन जाते हैं। जब पौधों में दो से पांच पत्तियां निकलती हैं तभी ये कीट हमला करना शुरू कर देते हैं। ये कीट पौधों का रस चूस लेते हैं जिससे पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और पौधे कमजोर हो जाते हैं। अगर समय रहते इन पर नियंत्रण न किया जाए तो पौधों की बढ़वार रुक सकती है और उत्पादन कम हो सकता है।
फल और पत्तियों को भी होता है नुकसान
कुछ कीट सीधे फलों और पत्तियों पर असर डालते हैं। कई बार छोटे फलों पर कीट डंक मार देते हैं जिससे फल सड़ने लगते हैं या उन पर दाग पड़ जाते हैं। वहीं कुछ कीट पत्तियों के अंदर सुरंग बनाकर उन्हें कमजोर कर देते हैं। इससे पत्तियां सूखने लगती हैं और पौधे धीरे धीरे कमजोर हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में फलों का आकार छोटा रह सकता है और गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। (Watermelon Farming)
नीम तेल से करें कीटों पर नियंत्रण
फसल को सुरक्षित रखने के लिए प्राकृतिक उपाय भी काफी असरदार माने जाते हैं। नीम तेल का छिड़काव कीट नियंत्रण के लिए एक अच्छा तरीका है। लगभग 1500 पीपीएम नीम तेल का छिड़काव 15 दिनों के अंतराल पर किया जा सकता है। इससे कीटों की संख्या धीरे धीरे कम हो जाती है और फसल सुरक्षित रहती है। नीम आधारित उत्पाद पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित माने जाते हैं और मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान नहीं पहुंचाते। (Watermelon Farming)
येलो स्टिकी ट्रैप भी है आसान उपाय
तरबूज (Watermelon Farming) और खरबूज की फसल को कीटों से बचाने के लिए खेत में येलो स्टिकी ट्रैप लगाना भी उपयोगी तरीका है। ये पीले रंग के चिपचिपे जाल होते हैं जिनकी ओर कई छोटे कीट आकर्षित होकर चिपक जाते हैं। इससे कीट पौधों तक नहीं पहुंच पाते। एक एकड़ खेत में लगभग 10 से 15 येलो स्टिकी ट्रैप लगाना अच्छा माना जाता है। यह तरीका सस्ता भी है और पर्यावरण के लिए सुरक्षित भी।
सही देखभाल से मिल सकता है अच्छा उत्पादन
अगर किसान शुरुआत से ही फसल की सही देखभाल करें और समय समय पर कीट नियंत्रण करते रहें तो तरबूज (Watermelon Farming) और खरबूज की खेती से अच्छा उत्पादन मिल सकता है। गर्मियों में इन फलों की मांग बाजार में लगातार बनी रहती है इसलिए अच्छे दाम मिलने की संभावना भी रहती है। सही तकनीक और सही समय पर प्रबंधन के साथ किसान कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं।
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