Moong Farming| मार्च में सरसों और मसूर की कटाई के बाद आपका खेत खाली रह जाता है और जुलाई में धान की रोपाई तक इंतजार करना पड़ता है तो अब यह खाली समय आपकी कमाई बढ़ाने का सुनहरा मौका बन सकता है। 60 से 70 दिन में तैयार होने वाली मूंग की फसल (Moong Farming) इस बीच बोई जा सकती है और धान से पहले अच्छी अतिरिक्त आय दे सकती है। यही नहीं यह फसल मिट्टी की सेहत भी सुधारती है जिससे अगली फसल को फायदा मिलता है।
मार्च से जून के बीच खाली खेत में क्यों बोएं मूंग
अक्सर देखा जाता है कि रबी की फसल कटने के बाद खेत खाली छोड़ दिए जाते हैं। लेकिन कृषि विभाग की सलाह है कि इस समय का सही उपयोग किया जाए। मूंग कम अवधि की दलहनी फसल है जो तेजी से बढ़ती है और कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है। अगर मार्च में बुवाई कर दी जाए तो जून तक फसल तैयार हो जाती है और खेत धान के लिए समय पर खाली भी हो जाता है। इससे फसल चक्र बेहतर होता है और जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहती है।
मिट्टी की सेहत सुधारने वाली फसल
मूंग (Moong Farming) केवल कमाई ही नहीं देती बल्कि जमीन को भी मजबूत बनाती है। जब इसकी फलियां तोड़ ली जाती हैं तो बचा हुआ हरा भाग खेत में पलट दिया जाता है। यह हरी खाद का काम करता है और मिट्टी में कार्बनिक तत्व बढ़ाता है। इससे अगली खरीफ फसल खासकर धान की बढ़वार अच्छी होती है। दलहनी फसल होने के कारण यह मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने में भी मदद करती है।
बुवाई का सही समय और खेत की तैयारी
मूंग की बुवाई (Moong Farming) के लिए 10 मार्च से 15 अप्रैल तक का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी में इसका उत्पादन बेहतरीन रहता है। लाल और काली मिट्टी में भी अच्छी देखभाल के साथ अच्छी पैदावार ली जा सकती है। बुवाई से पहले खेत की गहरी जुताई करना जरूरी है। इसके बाद मिट्टी को भुरभुरा बनाकर समतल कर लें। ध्यान रखें कि बुवाई के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी हो ताकि अंकुरण अच्छा हो सके।
उन्नत किस्मों से मिलेगा बेहतर उत्पादन
उन्नत किस्मों का चयन करने से पैदावार बढ़ाई जा सकती है। 60 से 70 दिन में पकने वाली किस्में समय पर तैयार हो जाती हैं और धान की रोपाई में देरी नहीं होने देतीं। सही बीज का चुनाव और प्रमाणित स्रोत से बीज लेना फायदेमंद रहता है। इससे रोग कम लगते हैं और उत्पादन स्थिर रहता है। (Moong Farming)
सीड ड्रिल से करें बुवाई और रखें संतुलित खाद
एक हेक्टेयर के लिए लगभग 20 से 25 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है। बुवाई सीड ड्रिल से की जाए तो बीज समान दूरी पर गिरते हैं और पौधों की बढ़वार अच्छी होती है। लाइन से लाइन की दूरी लगभग 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 4 से 5 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। संतुलित उर्वरक का प्रयोग भी जरूरी है। प्रति हेक्टेयर 10 से 15 किलोग्राम नाइट्रोजन 45 से 50 किलोग्राम फास्फोरस 50 किलोग्राम पोटाश और 20 से 25 किलोग्राम सल्फर देने से बेहतर उत्पादन मिलता है। समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण से फसल स्वस्थ रहती है।
कम समय में दोगुना फायदा
मूंग की फसल (Moong Farming) कम अवधि में तैयार हो जाती है इसलिए लागत भी सीमित रहती है। बाजार में दलहन की मांग अच्छी रहती है जिससे दाम भी संतोषजनक मिलते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह फसल धान से पहले खेत खाली कर देती है और मिट्टी को मजबूत बनाकर अगली फसल के लिए तैयार करती है। इस तरह किसान एक ही जमीन से साल में एक अतिरिक्त फसल लेकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।




