रबी की कटाई के बाद न छोड़ें खेत खाली , 100 दिन में तैयार होने वाली फसल से मिल सकता है शानदार मुनाफा

Makka Ki Kheti| रबी की फसल कटने के बाद कई किसानों के खेत कुछ समय के लिए खाली रह जाते हैं। इस समय अगर किसान चाहें तो मक्का की खेती करके अच्छा फायदा ले सकते हैं। मक्का ऐसी फसल है जो कम समय में तैयार हो जाती है और बाजार में इसकी मांग भी बनी रहती है।

अगर मार्च में इसकी बुवाई की जाए तो लगभग तीन महीने में फसल तैयार हो जाती है। इससे किसान धान की रोपाई से पहले ही मक्का (Makka Ki Kheti) बेचकर अतिरिक्त आय कमा सकते हैं। खेत खाली रखने से बेहतर है कि इस समय का सही उपयोग किया जाए और एक अतिरिक्त फसल लेकर कमाई बढ़ाई जाए।

क्यों बढ़ रही है मक्का की खेती

पिछले कुछ समय से किसान ऐसी फसलों की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं जो कम समय में तैयार हो जाएं और जिनकी बाजार में मांग भी बनी रहे। मक्का (Makka Ki Kheti)  ऐसी ही फसल है जो किसानों के लिए अच्छा विकल्प बनती जा रही है। इसका उपयोग खाने में कई तरह से किया जाता है।

इसके अलावा यह पशुओं के चारे के रूप में भी काफी उपयोगी है। इसी कारण इसकी मांग बाजार में लगातार बनी रहती है। हाइब्रिड बीज लगाने से मक्का का उत्पादन भी अच्छा मिलता है और पौधे मजबूत बनते हैं। यही वजह है कि अब कई किसान पारंपरिक खेती के साथ साथ मक्का की खेती भी करने लगे हैं। (Makka Ki Kheti) 

खेत की तैयारी

मक्का (Makka Ki Kheti) की अच्छी पैदावार के लिए खेत की सही तैयारी बहुत जरूरी होती है। सबसे पहले खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए। इससे मिट्टी नरम हो जाती है और जमीन में मौजूद कीट भी काफी हद तक खत्म हो जाते हैं। इसके बाद खेत को समतल करना जरूरी होता है ताकि सिंचाई के समय पानी पूरे खेत में बराबर फैल सके। जब मिट्टी भुरभुरी और साफ होती है तो बीज आसानी से अंकुरित होते हैं और पौधे तेजी से बढ़ते हैं। खेत की अच्छी तैयारी से फसल की शुरुआत ही मजबूत होती है।

बुवाई का आसान तरीका

मक्का की बुवाई (Makka Ki Kheti) करते समय बीज सही दूरी पर बोना जरूरी होता है। अगर बीज बहुत पास बो दिए जाएं तो पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती और उत्पादन भी कम हो सकता है। इसलिए लाइन बनाकर बुवाई करना अच्छा तरीका माना जाता है। अगर मशीन या सीड ड्रिल से बुवाई की जाए तो बीज समान दूरी पर गिरते हैं और पौधों की बढ़वार बेहतर होती है। इससे पौधों को हवा और धूप भी अच्छी तरह मिलती है और फसल स्वस्थ रहती है।

खाद का ध्यान रखें

मक्का (Makka Ki Kheti) की फसल को बढ़ने के लिए पर्याप्त पोषण की जरूरत होती है। इसलिए खेत में गोबर की सड़ी हुई खाद डालना बहुत फायदेमंद रहता है। इससे मिट्टी की ताकत बढ़ती है और पौधों को प्राकृतिक पोषण मिलता है। इसके साथ नाइट्रोजन फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करना भी जरूरी होता है। सही मात्रा में खाद देने से पौधे मजबूत बनते हैं और भुट्टे भी अच्छे और बड़े बनते हैं। अगर मिट्टी की जांच के अनुसार खाद का उपयोग किया जाए तो उत्पादन और भी बेहतर हो सकता है।

सिंचाई और सफाई

मक्का की खेती (Makka Ki Kheti) में समय पर सिंचाई करना भी बहुत जरूरी है। बुवाई के बाद हल्की सिंचाई करने से बीज अच्छी तरह मिट्टी में जम जाते हैं और अंकुरण जल्दी होता है। इसके बाद जरूरत के अनुसार सिंचाई करनी चाहिए। ध्यान रखना चाहिए कि खेत में पानी जमा न हो क्योंकि ज्यादा पानी से पौधों की जड़ें खराब हो सकती हैं। इसके अलावा खेत में उगने वाली घास और खरपतवार को समय समय पर हटाना जरूरी होता है ताकि पौधों को पूरा पोषण मिल सके और फसल अच्छी बढ़े।

90 से 100 दिन में तैयार फसल

अगर मक्का की खेती सही तरीके से की जाए और समय पर देखभाल की जाए तो यह फसल लगभग 90 से 100 दिनों में तैयार हो जाती है। इसके बाद किसान भुट्टे बेचकर अच्छी कमाई कर सकते हैं। कई जगहों पर मक्का की कीमत भी अच्छी मिल जाती है जिससे किसानों को अच्छा लाभ होता है। इस तरह रबी की फसल के बाद मक्का की खेती (Makka Ki Kheti) करना किसानों के लिए कम समय में अतिरिक्त आय कमाने का अच्छा तरीका बन सकता है।

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