मिडिल ईस्ट तनाव के बीच खेती को लेकर सरकार सतर्क, खाद की कमी न हो इसके लिए सरकार ने शुरू की बड़ी तैयारी

Fertilizer supply india| मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार ने खेती और उर्वरकों की सप्लाई को लेकर पहले से तैयारी शुरू कर दी है। सरकार का कहना है कि वर्तमान समय में देश में उर्वरकों की उपलब्धता सामान्य है और किसानों को खाद की सप्लाई में किसी तरह की परेशानी नहीं है। हालांकि अगर क्षेत्रीय संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो आयात पर असर पड़ सकता है। इसी संभावना को देखते हुए सरकार वैकल्पिक देशों से उर्वरक और कच्चे माल की आपूर्ति के विकल्प तलाश रही है।

उर्वरक के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भरता

भारत उर्वरकों के कच्चे माल के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया और मिडिल ईस्ट के देशों पर निर्भर है। देश में इस्तेमाल होने वाले यूरिया और फॉस्फेटिक उर्वरकों (Fertilizer supply india) का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात किया जाता है। इसके अलावा रॉक फॉस्फेट और फॉस्फोरिक एसिड जैसी महत्वपूर्ण सामग्री भी बड़ी मात्रा में इन देशों से आती है। ऐसे में यदि क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो आपूर्ति शृंखला प्रभावित होने की संभावना बन सकती है।

वैकल्पिक देशों से सप्लाई की तैयारी

सरकार ने संभावित जोखिम को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी शुरू कर दी है। उर्वरकों के लिए जरूरी कच्चे माल जैसे रॉक फॉस्फेट, सल्फर और यूरिया की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक देशों की तलाश की जा रही है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी परिस्थिति में किसानों को खाद की कमी का सामना करना पड़े और खेती का काम प्रभावित हो। – Fertilizer supply india

घरेलू उत्पादन भी देगा सहारा

देश में यूरिया का घरेलू उत्पादन भी पर्याप्त मात्रा में किया जा रहा है। यदि किसी कारण से आयात में कमी आती है तो घरेलू उत्पादन से सप्लाई को संतुलित किया जा सकता है। उर्वरक उत्पादन (Fertilizer supply india) के लिए आवश्यक लिक्विफाइड नेचुरल गैस की उपलब्धता भी फिलहाल सुरक्षित बताई जा रही है और भविष्य के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था पर काम किया जा रहा है।

किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह

विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि वे उर्वरकों का उपयोग संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से करें। फसलों के लिए अनुशंसित मात्रा में उर्वरक देने से उत्पादन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है। ज्यादा या गलत तरीके से उर्वरक उपयोग करने से मिट्टी की सेहत पर असर पड़ सकता है। –Fertilizer supply india

मिट्टी की उर्वरता पर भी ध्यान जरूरी

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कई जगहों पर मिट्टी की उर्वरता धीरे-धीरे कम हो रही है। इसलिए सिंचाई प्रबंधन, जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती जैसी पहल को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इन उपायों से मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। –Fertilizer supply india

कृषि निर्यात पर फिलहाल असर नहीं

सरकार के अनुसार मिडिल ईस्ट में तनाव के बावजूद भारत का कृषि निर्यात सामान्य बना हुआ है। खासकर बासमती चावल का निर्यात पहले से ही बड़े पैमाने पर किया जा चुका है और मांग में कमी के संकेत नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में फिलहाल किसानों और कृषि क्षेत्र पर किसी बड़े असर की आशंका नहीं जताई गई है। –Fertilizer supply india

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